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जगजीत सिंह: ग़ज़लों की मखमली शाम, जहां दर्द मुस्कुराता है

“तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो, क्या गम है जिसको छुपा रहे हो…” – ये शब्द से ऊपर, दिल की उदास धड़कन हैं, जो जगजीत सिंह की आवाज़ में बहकर आत्मा को छू जाते हैं। ग़ज़ल के बादशाह, जिनकी हर सांस संगीत जैसी लगती थी, हर लफ्ज़ कविता। लेकिन उनके जीवन की किताब में छिपे…

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HOMEBOUND : Review नहीं Preview

एक 2 घंटे की फ़िल्म आपको किस कदर तक 3 साल पहले के उस समय में लिए जाती है, जिसे शायद हम सब लगभग भूल चुके हैं? एक महामारी जिसने सबको आहत किया, पर समय के साथ हम उन सब चीज़ों के परे उठ कर, सब भूल कर, एक नई शुरुआत में लग चुके हैं…

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