लद्दाख में सोनम वांगचुक  NSA के तहत गिरफ्तार: छठी अनुसूची की मांग के बाद ‘हीरो से विलेन’ बने एक्टिविस्ट

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लेह (लद्दाख): लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने और पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के दौरान 24 सितंबर को हुई भीषण हिंसा के बाद प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता एवं शिक्षाविद् सोनम वांगचुक को 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार कर जोधपुर केंद्रीय कारागार भेज दिया गया है। इस घटना ने लद्दाख की राजनीति में भूचाल मचा दिया है और स्थानीय संगठनों ने केंद्र सरकार से सभी वार्ताएं स्थगित कर दी हैं।

24 सितंबर को लेह में सोनम वांगचुक के नेतृत्व में चल रही भूख हड़ताल के दौरान जब स्थानीय युवा उत्तेजित होकर सड़कों पर उतरे, तो शांतिपूर्ण प्रदर्शन हिंसक रूप ले गया। प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय भाजपा कार्यालय पर हमला कर आग लगा दी और पुलिस वाहनों को भी निशाना बनाया। स्थिति नियंत्रण से बाहर होने पर सुरक्षा बलों को फायरिंग करनी पड़ी, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और 70 से अधिक लोग घायल हुए।  इस हिंसा के तुरंत बाद लेह में कर्फ्यू लगाया गया और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं। पुलिस प्रशासन ने वांगचुक पर आरोप लगाया कि उन्होंने अपने भड़काऊ भाषणों से युवाओं को हिंसा के लिए उकसाया था।

लद्दाख पुलिस के डीजीपी एस.डी. सिंह जमवाल के अनुसार, वांगचुक के खिलाफ NSA का इस्तेमाल इसलिए किया गया क्योंकि उनके भाषणों में अरब स्प्रिंग, नेपाल और बांग्लादेश के उदाहरण देकर लोगों को उकसाने का काम किया गया था। 62 वर्षीय वांगचुक को 26 सितंबर की शाम उनके पैतृक गांव से गिरफ्तार कर तुरंत जोधपुर केंद्रीय जेल भेज दिया गया, जो लद्दाख से 1000 किलोमीटर से अधिक दूर है।

जोधपुर जेल में वांगचुक को उच्च सुरक्षा वार्ड में रखा गया है और उन पर 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी रखी जा रही है। NSA के तहत गिरफ्तारी का मतलब है कि उन्हें बिना जमानत के लंबे समय तक हिरासत में रखा जा सकता है।

SECMOL का FCRA लाइसेंस रद्द

वांगचुक की गिरफ्तारी से एक दिन पहले ही केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उनकी संस्था स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) का विदेशी योगदान नियंत्रण अधिनियम (FCRA) का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्د कर दिया था। सरकार ने आरोप लगाया कि संस्था ने विदेशी फंडिंग के नियमों का उल्लंघन किया था। गृह मंत्रालय के अनुसार, SECMOL ने 2021-22 में वांगचुक की ओर से 3.35 लाख रुपये FCRA खाते में जमा किए थे जो नियमों के विरुद्ध था। इसके अलावा स्वीडन से 4.93 लाख रुपये प्राप्त किए गए थे जो खाद्य सुरक्षा (Food Sovereignty) पर अध्ययन के लिए थे, लेकिन सरकार ने इसे राष्ट्रीय संप्रभुता के अध्ययन के रूप में गलत व्याख्या करते हुए राष्ट्रीय हित के विरुद्ध बताया।

पाकिस्तान कनेक्शन के आरोप

लद्दाख पुलिस प्रमुख ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वांगचुक के पाकिस्तानी खुफिया एजेंट से संपर्क थे। DGP जमवाल ने दावा किया कि हाल ही में गिरफ्तार एक पाकिस्तानी खुफिया ऑपरेटिव (PIO) वांगचुक के संपर्क में था और पाकिस्तान को जानकारी भेजता रहता था। उन्होंने यह भी कहा कि वांगचुक ने पाकिस्तान में Dawn अखबार के इवेंट में भाग लिया था और बांग्लादेश की भी यात्रा की थी, जिससे उनकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।

वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उनके पति को चार साल पहले से ही निशाना बनाया जा रहा है जब से उन्होंने लद्दाख के लिए छठी अनुसूची की मांग उठाई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियां बार-बार उनके घर और NGO के कार्यालयों में आकर विदेशी फंडिंग के बारे में सवाल करती रही हैं।

गीतांजलि ने स्पष्ट किया कि स्वीडन से आने वाला फंड ‘फूड सॉवरेंटी’ (खाद्य संप्रभुता) के अध्ययन के लिए था, न कि राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए, जैसा कि सरकार ने गलत व्याख्या की है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जानबूझकर उनके उत्तर की गलत व्याख्या की है।

क्या हैं सोनम वांगचुक की मांगे :                                

सोनम वांगचुक और लेह एपेक्स बॉडी की मुख्य मांगें -:

  1. राज्य का दर्जा: लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश से पूर्ण राज्य का दर्जा देना
  2. छठी अनुसूची: संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करना ताकि स्थानीय समुदायों को विशेष अधिकार मिल सकें
  3. अलग लोकसभा सीट: लेह और कारगिल के लिए अलग-अलग संसदीय सीटें
  4. रोजगार के अवसर: स्थानीय युवाओं को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता
  5. पर्यावरण संरक्षा: लद्दाख की नाजुक पारिस्थितिकी की सुरक्षा

वांगचुक की गिरफ्तारी के बाद लद्दाख की प्रमुख संस्थाओं लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस ने केंद्र सरकार के साथ सभी बातचीत स्थगित करने की घोषणा की है। इन संगठनों ने स्पष्ट किया कि जब तक वांगचुक समेत सभी गिरफ्तार कार्यकर्ताओं को रिहा नहीं किया जाता, वे सरकार से कोई वार्ता नहीं करेंगे।

लद्दाख बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहम्मद शफी लस्सू ने कहा कि NSA के तहत गिरफ्तारी वांगचुक को नोबेल पुरस्कार दिला सकती है क्योंकि उनका आंदोलन पूर्णतः गांधीवादी और अहिंसक था।

कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने वांगचुक के समर्थन में आवाज उठाते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि लद्दाख भाजपा और आरएसएस के निशाने पर है और सरकार को लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करना चाहिए। 

राहुल गांधी ने ट्विटर पर लिखा, “हत्या बंद करो, हिंसा बंद करो, धमकी बंद करो। लद्दाख को आवाज दो और उन्हें छठी अनुसूची में शामिल करो।”

केंद्र सरकार का पक्ष

केंद्र सरकार का कहना है कि वांगचुक के भाषण हिंसा भड़काने वाले थे और उन्होंने अरब स्प्रिंग, नेपाल और बांग्लादेश के उदाहरण देकर युवाओं को उकसाया था। सरकार का यह भी मानना है कि उनकी गतिविधियां राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हैं।

गृह मंत्रालय के अनुसार, वांगचुक और उनके संगठनों की विदेशी फंडिंग में कई अनियमितताएं पाई गईं हैं जो FCRA नियमों का उल्लंघन करती हैं। इसके अलावा उनके पाकिस्तानी संपर्कों को लेकर भी चिंता जताई गई है।

कौन हैं सोनम वांगचुक                                          

62 वर्षीय सोनम वांगचुक लद्दाख के एक प्रसिद्ध शिक्षाविद्, इंजीनियर और पर्यावरण कार्यकर्ता हैं। उन्होंने NIT श्रीनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की और शिक्षा सुधार के क्षेत्र में काम शुरू किया। बॉलीवुड फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ का मुख्य किरदार उन्हीं से प्रेरित था।

वांगचुक ने SECMOL और हिमालयन इंस्टिट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव लर्निंग (HIAL) जैसी संस्थाओं की स्थापना कर लद्दाख में शिक्षा सुधार और पर्यावरण संरक्षण का काम किया है। उन्हें रेमन मैग्सेसे पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं।

सोनम वांगचुक का मामला लद्दाख की जटिल राजनीतिक स्थिति को उजागर करता है। एक तरफ केंद्र सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंताओं का हवाला देती है, वहीं स्थानीय समुदाय अपनी सांस्कृतिक पहचान और पर्यावरणीय अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है।

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