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जगजीत सिंह: ग़ज़लों की मखमली शाम, जहां दर्द मुस्कुराता है

“तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो, क्या गम है जिसको छुपा रहे हो…” – ये शब्द से ऊपर, दिल की उदास धड़कन हैं, जो जगजीत सिंह की आवाज़ में बहकर आत्मा को छू जाते हैं। ग़ज़ल के बादशाह, जिनकी हर सांस संगीत जैसी लगती थी, हर लफ्ज़ कविता। लेकिन उनके जीवन की किताब में छिपे…

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